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ये सिर्फ हैडलाइन मैनेजमेंट बजट है – सुनील सिंह

By Gorakhpur Express News

Gorakhpur Express News समाजवादी पार्टी के नेता सुनील सिंह बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है की २०१७- १८ का बजट किसानों को समर्पित करने वाला नहीं था यह किसानों को ही सरकार के समक्ष आत्म समर्पण कराने वाला था, पूर्वांचल में सबसे अधिक खेत में खड़ी फसल जली, औने पौने दाम में फसल बिक गए, बिचौलिए खा गए. २०१८-१९ जिसे औद्योगिक विकास के लिए समर्पित किया गया था उसने प्रदेश के उद्यमियों को अदानी अंबानी के समक्ष आत्म समर्पण करा दिया. वर्ष २०१९-२० जो महिला सशक्तीकरण को समर्पित था वहां प्रदेश के बाहुबली हमारी बहू बेटियों से बलात्कार कर रहे थे. ये तीन वर्ष किसान, व्यापारियों एवं महिलाओं को समर्पित था या उनका आत्म एवं सर्वस्व समर्पण लेने के लिए था ? मुख्यमंत्री जबाब दें.

बजट में बताया गया कि सफल इन्वेस्टर समिट किया गया, अखबारों की हैडलाइन बढ़ाने के लिए योगी सरकार निवेश की राशि बढ़ा चढ़ा कर बता रही है, २ लाख के वास्तविक निवेश का दावा करने वाली योगी सरकार निवेश का डाटा और उसपे श्वेत पत्र पेश करे. 468000 करोड़ के MOU के भ्रम की सच्चाई स्पष्ट करे, MOU की राशि बढ़ाने के फर्जीवाड़े में गोरखपुर के सांसद ने भी MOU किया था, बताएं सांसद रवि किशन ने कितना निवेश जमीन पर उतारा की ये बस MOU की रकम को बढ़ाने में भागीदार थे. अगर बजट में इस बात का उल्लेख है तो सरकार को इस बात का जबाब देना पड़ेगा.

सरकार अब विकास के बजट से ज्यादे इवेंट की बजट बनाने लगी है. ये सरकार अब विकास की नहीं इवेंट की सरकार हो गई है, इसे लोगों के सुख से नहीं, इनके अधिकारीयों को सुख इवेंट के ठेकेदारों को पेमेंट करने में ज्यादे है.

इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस का क्या हाल है सरकार बताये, सिंगल विंडो सिस्टम के कितने सफल केस हुए हैं सरकार बताये. खाली हैडलाइन मैनेजमेंट हैं, इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस का आलम ये है की लोग यूनिट बंद कर रहें हैं, व्यापारी आत्महत्या कर रहें हैं.

बजट में उल्लिखित कानून व्यवस्था के जीरो टॉलरेंस का ये हाल है की कचहरी में बम चल रहें हैं और जेल में मर्डर हो रहा है अब न्याय का फरियादी जाए तो जाए कहाँ. सरकार UPCOP मोबाइल बनाने में व्यस्त है, उसे पुलिस मोबाइल में दिखनी चाहिए लोगों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर नहीं, ये पूरी सरकार चम्मक चुम्मक के आकर्षण में फंस गई है और ट्रंप के लिए खिंच रही दिवार की तरह दुसरे तरफ की गरीबी से लोगों का ध्यान हटा रही है.

वर्षो से आन्दोलन रत शिक्षा मित्र भाइयों के लिए कुछ नहीं मिला इस बजट में हालात जस के तस हैं शिक्षा मित्र भाई आत्महत्या कर रहा है और नीरो बंसी बजा रहा है.

ये सिर्फ हैडलाइन मैनेजमेंट बजट है मोदी जी की गुजराती दीवार की तरह, वह वहां दीवार खड़ा कर गरीबी छुपा रहें हैं और ये यहाँ हैडलाइन से छुपा रहे हैं.

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