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कौन थी छठी मैया? क्यों होती है देवी के साथ सूर्य देव की पूजा? जानिए पूरी जानकारी

आशीष श्रीवास्तव (Gorakhpur Express News .Com) दिवाली के कुछ दिनों बाद उत्तर भारत के बिहार राज्य का प्रसिद्ध त्योहार छठ पूजा मनाया जाता है इस वर्ष छठ पूजा 13 नवंबर और 14 नवंबर को मनाया जाएगा 11 नवंबर यानी आज से नहाय खाय से इस पर्व का शुभारंभ किया जाएगा हिंदू कैलेंडर के मुताबिक यह त्यौहार हर वर्ष कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को ही मनाया जाता है छठ पर्व में छठी मैया के साथ साथ भगवान सूर्य देव की भी पूजा होती है छठी मैया को षष्ठी देवी भी कहा जाता है छठ पूजा से पहले दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है दूसरे और तीसरे दिन पूरे दिन निर्जला उपवास किया जाता है तीसरे दिन की शाम और उससे अगली सुबह पवित्र नदी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है परंतु क्या आप इस बात को जानते हैं कि छठ पूजा को आखिर क्यों मनाया जाता है? छठ पूजा में छठी मैया के साथ साथ सूर्य देवता की आखिर क्यों पूजा की जाती है,आखिर कौन थी छठी मैया? शायद आप लोगों में से बहुत से लोगों के मन में यह विचार जरूर आया होगा परंतु आप लोगों को इसके पीछे की वजह नहीं पता होगी आज हम आपको इस लेख के माध्यम से इसी विषय में जानकारी देने वाले हैं।

कौन थी छठी मैया
पौराणिक मान्यता अनुसार देखा जाए तो भगवान श्री राम जी और माता सीता ने पहली बार छठी मैया की पूजा की थी इसके पश्चात से ही छठ का त्यौहार मनाया जाने लगा था ऐसा कहा जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के पश्चात जब भगवान श्री राम जी और माता सीता जी वापस अयोध्या लौट कर आए थे तब उन्होंने कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठी माता की पूजा की थी इसी दौरान इन्होंने सूर्य देवता की भी पूजा की थी तभी से यह त्यौहार लोगों के बीच काफी प्रचलित हो गया है। इसके अलावा द्वापर युग में सूर्यपुत्र कर्ण ने भी छठ पूजा की थी इसी दिन उन्होंने सूर्य देवता की भी पूजा की थी सूर्य देव के प्रति उनकी आस्था आज भी लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय रहती है सूर्यपुत्र कर्ण हमेशा कमर तक के जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते थे सूर्य देव के आशीर्वाद की वजह से ही उनको सम्मान प्राप्त हुआ था तभी से सूर्य देव की उपासना किया जाता है।

छठ पर्व के विषय में हिंदू मान्यता के अनुसार एक और कथा काफी प्रचलित है इस कथा के अनुसार महाभारत काल में द्रौपदी ने छठी मैया का व्रत रखा था ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने अपने परिवार की सुख और शांति के लिए यह व्रत किया था द्रोपति अपने परिवार के लोगों की लंबी आयु के लिए नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा किया करती थी।

छठ का पर्व क्यों मनाया जाता है
ज्यादातर लोगों को इस बात की जानकारी तो जरूर होगी कि छठ का पर्व क्यों मनाया जाता है और किस प्रकार से मनाया जाता है इससे जुड़े हुए सभी नियम तो आप लोगों ने जाने लिए परंतु क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि छठी मैया या छठी देवी कौन

थी/ कौन थी छठी मैया? आखिर क्यों छठ पूजा पर सूर्य देवता की भी पूजा होती है धार्मिक ग्रंथ ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार हिंदू धर्म में आदिशक्ति के नौ रूपों में से षष्ठी देवी को ही छठ मैया कहा जाता है इन्हें भगवान ब्रह्मा की मानास्पुत्री कहा जाता है यह वह देवी है जो निसंतान की झोली भर्ती है जिन लोगों को संतान की प्राप्ति नहीं होती है और वह संतान के सुख से वंचित रहते हैं उनके ऊपर इनकी कृपा रहती है।

आखिर छठ में देवी माता के साथ-साथ सूर्य देवता की पूजा क्यों की जाती है इसके पीछे भी कई मान्यताएं है जो शास्त्रों पर ही आधारित है शास्त्रों में षष्ठी देवी को अंश प्रदान करने वाली माना गया है और सूर्य प्रकृति से जुड़े हैं छठ पर्व में प्रकृति और अंश दोनों को ही पानी की कामना की जाती है छठ के लोकगीतों में भी इसका उदाहरण दिखाई देता है उदाहरण के तौर पर “अन-धन सोनवा लागी पूजी देवलघरवा हे, पुत्र लागी करीं हम छठी के बरतिया हे” इस प्रकार से छठ पूजा के दौरान महिलाएं छठी मैया से संतान प्राप्ति और संतान को सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं और भगवान सूर्य से अन्न धन संपत्ति आदि प्राप्त करने की भी प्रार्थना करती हैं।