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पशु सेड को बनाया गैरेज, भैस के जगह खड़ा होता है लग्जरी चार पहिया वाहन

महराजगंज ( मिठौरा ): सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। हर गरीब के लिए तमाम लाभ देने का प्रयास कर रही है लेकिन उस लाभ को धरातल पर पहुँचाने वाले छोटे कर्मचारी जैसे बीडीओ ,सेक्रेटरी व रोजगार सेवक जमकर मलाई काट रहे हैं ये हम इसलिए कह रहे हैं कि विकासखण्ड मिठौरा के ग्राम सभा मुजहना बुजुर्ग में रोजगार सेवक ने पात्र व्यक्तियों को अपात्र घोषित कर ख़ुद के ही जमीन पर अपने पिता के नाम पर हीरा पुत्र महादेव के नाम पर 2018-19 में पशु शेड निर्माण कराया है। जबकि उस पशु शेड में पशुओं को न रख अपनी चारपहियां वाहन रख गेराज के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

तजुबक की बात है कि जोजरूरतमंद हैं वो अधिकारियों के चक्कर काटते काटते उनके पैर के चप्पल घिस गए होंगे लेकिन उनको नही मिला सरकार के अंग को ही मिल गया कैसे विडंबना हैं ये?
उत्तरप्रदेश सरकार ने बेरोजगार व्यक्तियों जो पशु-पालन कर अपनी आजीविका चलाते है,उनके लिए पशु-पालन करने के लिए सरकार ने मनरेगा के तहत पशुशेड निर्माण कराने का प्रावधान चलाया था। इस योजना में ‘पहले आओ पहले पाओ’ का प्रावधान था।

सरकार के आदेशानुसार सभी ब्लॉकों के ग्रामप्रधान व ग्राम पंचायत मित्रों का कर्तव्य था की अपने ग्रामसभा में पात्र व्यक्तियों की सूची बनाये व उन्हें पशु शेड योजना का लाभ दिलाये।
ग्राम सभा मुजहना बुजुर्ग के रोजगार सेवक शैलेश भारती है । जो ग्राम सभा मुजहना बुजुर्ग में बिना पात्र व्यक्तियों की सूची बनाएं व इस योजना के बारे में बिना जानकारी दिए अपने ख़ुद की निजी भूमि पर अपने पिता के नाम पशु शेड का निर्माण करा दिया। वर्ष 2018 – 19 में हरि पुत्र महादेव के नाम पर पशु शेड निर्माण हुआ।

ग्रामीणों ने यह भी बताया की पशु शेड की जाँच में जब जिले से अधिकारी आये थे तब रोजगार सेवक ने किसी और के गाय के बछड़े को बांध कर जाँच पूरी कराया।

पशुशेड बनने के कुछ दिन बाद से ही रोजगार सेवक शैलेश भारती अपनी निजी वाहन उस पशु शेड में खड़ी करता है व बाकी अपात्र होने के बावजूद पात्र बन योजना का लाभ उठाता है।

आपको बता दे की मुजहना बुजुर्ग में ऐसे भी पात्र व्यक्ति हैं जिनके घर 25 से 30 भैंस है जो अपनी आजीविका पशुओं के सहारे ही चलाते है।

अब सवाल खड़ा होता है कि आखिर इसका भुगतान किसके कहने पर हुवा ? कही ऐसा तो नही अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को उनका हिस्सा मिल गया जिसके बाद भुगतान हो गया। अभी मनरेगा में धांधली चल ही रहा है वही यहाँ नियम को ताख पर रख कर उनको पहले पात्र बनाया फिर सरकार के रकम को साहब के गाड़ी खड़ा करने के लिए पशु सेड बनवा दिया। क्या पशु यहाँ तो पशु से बड़े साहब का पहुच हैं जो बिना पशु के ही लाभ ले लिया। एक ग्रामीण के मुताबिक जब अधिकारी गाव में जांच करने पहुंचे तो ब्लॉक के एक अधिकारी ने ये बुद्धि दिया कि किसी का पशु कुछ घंटों के लिए भाड़े पर ले लो और दिखा दो। साहब ने उसका कुछ लिया होगा तभी तो ऐसा राम बाण उपाय बता दिया।

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